कहीं रंगे मस्ती न आंखों से झलके .मये नाब जिस तरह शीशे से छलके ..
है सीने मे यूं ज़ख्म खंदा हमारे .खिले जा बजा फूल जैसे केवल के ..
लगी झूमने शाख्हे गुल मस्त होकर .सबा के जो झोंके चले हलके-हलके ..
क़दम डगमगाए कई बार मेरे चला ब्ज्मे साकी से मैं जो निकल के..
गुलिस्ताँ ने सीखी है कलियों से शायद .अदा दिल कशी की ये काटों मे पलके
करे फाश राज़े मोहब्बत न मेरा .मेरे अश्क दामन पे पलको से ढलके ..
मुझे देखकर "मस्त" सरशारे उल्फत .रहे मैकदे में सभी हाथ मलके..
-'mast' allahabadi
mast allahabadi is pen name of my late father sri shyam lal varma.i intend to post some more of his ghazals .