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| Saturday 6 September, 2008 |
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gazal byshyam lal varma "mast"allahabadi
वो जाने बहारां नहीं है,कली दिल की खनदां नहीं है,तुझे एक नज़र देख लूं बस,कोई और अरमां नही है।बुझा सा है सीने मे दिल भी,वो शमये शबिसतां नहीं है।नज़र का है उनकी करिश्मा,ये बिजली ये तूफां नहीं है।नशेमन को सैयाद मेरे गमे बरकों बारा नहीं है।तेरे दिल के सागर में ज़ाहिद मये जामे इरफां नहीं है।तेरा "मस्त है मशरब। ये हिन्दू मुसलमां नहीं
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